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Forest Man The True Story of Jadav Payeng in Hindi – फ़ॉरेस्ट मेन की कहानी

Jadav Molai Payeng Story in Hindi
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परिचय Introduction

आपने ही-मेन, सुपरमेन, स्पाइडर मेन जैसे कई काल्पनिक हीरो की कहानिया पढे होंगे | इनके कारनामे और किस्से सिर्फ काल्पनिक हैं | पर आज हम एक फ़ॉरेस्ट मेन की कहानी पढेंगे जो एक सच्ची कहानी है |

एक आम आदमी अपने बलबूते से, सच्ची लगन और मेहनत के जरिये उगाया एक बंजर जमीन पर १३६० एकड का जंगल | ३० सालों की मेहनत रंग लायी और असम्बभ को संबभ कर दिखाया जादव मुलाई पायेंग ने |

तो चलिए जानते हैं जादव पायेंग की जीवन और molai forest की कहानी |

Jadav Molai Payeng Story in Hindi

1779 साल में असम के पास ब्रह्मपुत्र नदी में भयंकर बाड आई थी | जिस बाड में बहकर कई सारे सांप मरने लगे थे | मोलाई ये सब देखकर बहोत परेसान होने लगे | तब वो सिर्फ 16 साल के थे |

वो अपने से बड़ों से इस बारे में बात किये | तो वो लोग बोले कोई पेड़ पौधे ना होने कारण सांप बाड में अपनी जान बचा नहीं पा रहे हैं | तब मोलाई बोले हम पेड़ तो लगा सकतें हैं | तब उनसे बड़े लोगों ने कहाँ नदी के किनारे वाली जमीन सब बंजर हो गयी है, और वहां पेड़ लगाना मुमकिन नहीं |

पर जादव मोलाई की फिकर कम नहीं हुई | वो बचपन से प्रकृति और जिव जंतु से बहोत प्यार करते थे | इस बारे में वो forest department से बात भी करने गए | पर वहां से भी कोई मदद नहीं मिली |

तब मोलाई खुद ही उस बंजर जमीन पर 20 बांस के पेड़ लगा दिए और हमेसा पेड़ों की देखभाल करते रहे |

उसी दौरान एक forest department ने जोरहाट डिस्ट्रिक्ट स्तिथ कोकिलामुख में करिब 200hectares area में पेड़ लगाने का अभियान सुरु किया | उस अभियान में मोलाई भी शामिल हुए और एक मजदूर बनकर पेड़ लगाना सुरु कर दिए | 5 साल बाद वो अभियान पूरा हुआ और department के सभी कर्मचारी और मजदूर वहां से चले गए |

पर मोलाई पेड़ लगाने वाले काम को छोड़े नहीं | वो लगे हुए सारे पेड़ों का देखभाल करते रहे और अधिक नए पेड़ लगाते रहे | ऐसा वो लगातार 30 साल तक करते रहे जिसका परिणाम ये हुआ की आज वो बंजर जमीन 1360 acres की हरा भरा जंगल बन चूका है |

उस जंगल में कई बंगाल टाइगर, भारतीये गेंडे, हिरण, खरगोश आदि जानवर रहते हैं | अन्य जानवरों के साथ साथ कई प्रकार के परिंदे का घर बन गया है ये जंगल |

मोलाई उसी जंगल में एक छोटी सी कुटिया बनाकर रेहते हैं और जंगल तथा उसमे रहने वाले जानवरों की रक्षा करतें हैं | उनके साथ उनकी पत्नी और 3 बच्चे भी रहते हैं | पूरा परिवार मिलकर जंगल में नए पेड़ लगाना और पेड़ों की देखभाल करता है |

2008 में एक प्रत्रकार ने मोलाई के इस काम के बारे में जाना और इस ख़बर को बाकि दुनीया तक पहोंचायी | मोलाई को इस महान काम के लिए कई पुरस्कार दिए गए हैं | 2015 में जादव मोलाई को पद्मश्री पुरष्कार से सम्मानित किया गया | और उस जंगल आज molai forest के नाम से जाना जाता है | और जादव मोलाई को india का forest man कहा जाता है |

पर्यावरण से प्रेम और जिव जंतु के जीवन को बचाने के लिए मोलाई ने अपना पूरा जीवन लगा दीया | बिना कोई स्वार्थ के वो 16 साल से ही मेहनत करते रहें और आज एक विराट जंगल खड़ा कर दीया | एक साधारण इंसान ने एक असाधारण काम करके पूरी दुनीया को बड़ी मिशाल दी है |

moral of the story (कहानी की अनमोल शिक्षा)

मोलाई असम के एक ट्राइब परिवार में जनम लिए थे | उनके पास कोई खास साधन नहीं थी और नाहीं किसीका साथ | अगर पास था तो उनका ढृढ़ निश्चय के कुछ भी करके पेड़ लगाना है और जानवरों को बिलुप्त होने से बचाना है |

वो चाहतें तो औरों की तरह दूसरों को दोष दे सकते थे | सरकार और forest department की निंदा कर सकतें थे | और ये सोच कर बैठ जाते की में क्या कर सकता हूँ | मेरे पास तो कोई साधन ही नहीं है |

पर उन्होंने ऐसा नहीं किया | वो खुद अपने ऊपर जिम्मेदारी लिए और और हर छोटे छोटे प्रयास करते गए | आखिरकार उनकी मेहनत रंग लायी और एक असम्भब काम संबभ हो गया | जिस बंजर जमीं पर एक घास भी नहीं उगता था | आज वो एक हरा भरा जंगल हो गया है |

यही होता है परिणाम जिम्मेदारी लेने से | बुलंद इरादे और खुदसे करने का निश्चय किसी भी इंसान को कोई भी बड़े काम को अन्जाम तक ले ही जाती है | इसीलिए दूसरों को दोष देना छोड़ें और खुद बीड़ा उठाना सीखें | क्यूंकि आप में भी असीम शक्ति है हर मुस्किल को पार कर जाने की और अपने लक्ष को पूरा करने की |

आपका दिन शुभ हो !

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